एलपीजी की किल्लत से अंगीठी की मांग बढ़ी, दाम दोगुने

Apr 2, 2026 - 17:29
Apr 2, 2026 - 17:30
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एलपीजी की किल्लत से अंगीठी की मांग बढ़ी, दाम दोगुने

सरोजनीनगर, संवाददाता। एलपीजी की लगातार बनी किल्लत का असर अब सीधे बाजार पर दिखने लगा है। रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण अंगीठी की मांग अचानक तेजी से बढ़ गई है, जिससे इसकी कीमतें भी लगभग दोगुनी हो गई हैं।

         गैस की किल्लत के चलते फास्ट फूड विक्रेता, ढाबा संचालक और आम लोग फिर से पारंपरिक साधनों की ओर लौट रहे हैं। होटल-ढाबों के कारीगरों ने भी अंगीठी का सहारा लेना शुरू कर दिया है, जिससे इसकी मांग और बढ़ गई है। स्थिति यह है कि कारीगरों के पास कच्चा माल होने के बावजूद समय की कमी के कारण वे ऑर्डर पूरा नहीं कर पा रहे हैं। सरोजनीनगर क्षेत्र में अंगीठी बनाने वाले कारीगर बताते हैं कि पहले रोजाना सीमित संख्या में ऑर्डर मिलते थे, लेकिन अब मांग इतनी बढ़ गई है कि समय पर सप्लाई करना मुश्किल हो गया है। कीमत भी गुणवत्ता के आधार पर पहले से कहीं अधिक वसूली जा रही है। कारीगरों के मुताबिक, लोहे की अंगीठी पहले करीब 300-400 रुपये में बिकती थी, जो अब बढ़कर 600-800 रुपये तक पहुंच गई है। मिट्टी की अंगीठी की कीमत भी दोगुनी हो चुकी है।

इनसेटः ढाबों पर कोयला-लकड़ी का राज
इनसेट-गैस संकट ने शहर के छोटे-छोटे ढाबों और होटलों की रसोई का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। अब इनकी भट्ठियां गैस की जगह लकड़ी और कोयले के धुएं से सुलग रही हैं। कानपुर रोड के बंथरा स्थित श्रीकृष्णा ढाबा संचालक शुभम यादव कहते है कि कमर्शियल सिलेंडर खरीदना तो दूर, उसकी कीमत सुनना भी भारी लग रहा है। मजबूरी में भट्टी पर काम करना पड़ रहा है, लेकिन जैसे ही ग्राहकों से बढ़े दाम मांगे जाते हैं, बहस शुरू हो जाती है। वहीं सरोजनीनगर के गौरी बाजार में आलू टिक्की की दुकान चलाने वाले आदित्य का कहना है कि बिना गैस के काम चलाना मुश्किल है। पहले जहां रोजाना करीब 1000 रुपये की कमाई हो जाती थी, अब वह घटकर 300-400 रुपये रह गई है। गैस संकट ने छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है।