इसरो के गगनयान अभियान में योगदान देना लक्ष्य : शुभांशु शुक्ला
एयरपोर्ट परिसर स्थित एएसजी द्वारा आयोजित किया गया प्रेरक वार्ता एवं संवाद कार्यक्रम
लखनऊ। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला कहा कि अंतरिक्ष यात्रा से वापस आने के बाद जिस तरह से मेरा जगह-जगह पर स्वागत किया जा रहा है उसे मैं अभिभूत हूं लेकिन अभी मेरा लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है। मुझे इसरो द्वारा चलाए जा रहे हैं गगनयान अभियान के अंतर्गत भी अपने अनुभव का योगदान देना है और मैं चाहता हूं कि हमारे देश से कई लोग गगनयान अभियान के तहत अंतरिक्ष पहुंचे। वह शुक्रवार को लखनऊ से बेंगलुरु जाने के दौरान एयरपोर्ट स्थित न्यू यूनिट लाइन, सीआईएसएफ कैंप एएसजी परिसर मे आयोजित प्रेरक वार्ता एवं संवाद कार्यक्रम के दौरान जवानों को सम्बोधित कर रहे थे।
इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर हम कहें कि डर कभी नहीं लगता, ये कहना गलत होगा। डर सबको लगता है लेकिन हमारे पीछे एक भरोसेमंद टीम होती है जिसे हम अपनी जिंदगी सौंप देते हैं। उन्होंने सवालों का जवाब देते हुए कहा कि ह्यूमन स्पेस मिशन को अंजाम देने का फायदा सिर्फ ट्रेनिंग तक ही सीमित नहीं है। वहां रहकर जो अतिरिक्त ज्ञान हमें मिलता है, वह अमूल्य है। पिछले एक साल में मैंने जो भी जानकारी इकट्ठा की है, वह हमारे अपने मिशनों, गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए बेहद उपयोगी होगी। बहुत जल्द हम अपने कैप्सूल से, अपने रॉकेट से और अपनी धरती से किसी को अंतरिक्ष में भेजेंगे। यह अनुभव जमीन पर सीखे गए अनुभवों से बहुत अलग होता है। शरीर कई बदलावों से गुजरता है। अंतरिक्ष में 20 दिन बिताने के बाद शरीर ग्रेविटी में रहना भूल जाता है। इससे पहले उप कमांडेंट कुंवर अभिषेक नारायण द्वारा श्री शुभांशु शुक्ला का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान श्री शुक्ला ने एक प्रेरक भाषण दिया और सीआईएसएफ कर्मियों के साथ बातचीत की तथा उनके प्रश्नों के उत्तर दिए। कार्यक्रम के दौरान श्री शुक्ला के साथ ही उनके परिवार को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन उप कमांडेंट श्री कुंवर अभिषेक सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के 324 जवानों द्वारा प्रतिभाग किया गया। अगर हम कहें कि डर कभी नहीं लगता, ये कहना गलत होगा। डर सबको लगता है लेकिन हमारे पीछे एक भरोसेमंद टीम होती है जिसे हम अपनी जिंदगी सौंप देते हैं।
