फेसलेस परिवहन सेवाओं पर कर्मचारियों का विरोध
रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी की जिम्मेदारी हटाने की मांग
लखनऊ आरटीओ में प्रदेशभर के कर्मचारियों की बैठक
बिना अधिकार जवाबदेही तय करने पर जताई आपत्ति
लखनऊ। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की जनसेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन, संपर्क रहित और ऑटो-अप्रूव्ड बनाने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। नई व्यवस्था में बाबुओं और अधिकारियों की भूमि
का लगभग समाप्त हो जाएगी, लेकिन कर्मचारियों ने रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी और वेरिफिकेशन से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।
इसी मुद्दे पर रविवार को लखनऊ स्थित आरटीओ कार्यालय में उत्तर प्रदेश संभागीय कर्मचारी संघ की बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से सैकड़ों कर्मचारी शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंह ने की। बैठक में फेसलेस सेवाओं के संभावित दुष्परिणामों और कर्मचारियों की जवाबदेही पर विस्तार से चर्चा की गई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि किसी अन्य राज्य से वाहन हस्तांतरण (ट्रांसफर) के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है तो उनके सिस्टम पर आवेदन के साथ अपलोड किए गए दस्तावेज दिखाई नहीं देंगे। ऐसे में वे यह सत्यापित नहीं कर पाएंगे कि आवेदक ने कौन-कौन से दस्तावेज लगाए हैं। यदि गलत या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वाहन का पंजीकरण अथवा हस्तांतरण हो जाता है और बाद में कोई विवाद या शिकायत सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी पर आ जाएगी।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि जब रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को दस्तावेजों की जांच और निर्णय प्रक्रिया में कोई वास्तविक भूमिका नहीं दी जा रही है, तो उन्हें केवल औपचारिक रूप से जिम्मेदार बनाना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि कर्मचारियों को रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए, ताकि भविष्य में किसी न्यायालय या अन्य जांच एजेंसी के समक्ष उन्हें अनावश्यक रूप से जवाबदेह न ठहराया जाए। बैठक में मौजूद कर्मचारियों ने कहा कि यदि फेसलेस व्यवस्था लागू करनी है तो जवाबदेही भी उसी के अनुरूप स्पष्ट की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना अधिकार और जानकारी के जिम्मेदारी तय करना कर्मचारियों के हितों के साथ न्याय नहीं होगा।
