कौशल प्रशिक्षण से युवा और ग्रामीण बन सकते हैं आर्थिक रूप से सशक्त : डॉ. पूनम सिन्हा

Jul 9, 2026 - 14:07
 0  5
कौशल प्रशिक्षण से युवा और ग्रामीण बन सकते हैं आर्थिक रूप से सशक्त : डॉ. पूनम सिन्हा
निसबड एवं वन विभाग की संयुक्त कार्यशाला में 40 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, वन क्षेत्रों के ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर
 
पलियाकलां, संवाददाता। भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (निसबड) एवं उत्तर प्रदेश वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में एक दिवसीय उद्यमिता एवं कौशल विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में वन क्षेत्रों से जुड़े ग्रामीणों को कौशल विकास और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में कुल 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
         

 

       कार्यशाला को संबोधित करते हुए निसबड की महानिदेशक डॉ. पूनम सिन्हा ने कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं और ग्रामीणों के लिए निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रही है। इन प्रशिक्षणों का लाभ उठाकर युवा न केवल रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि स्वयं का उद्यम स्थापित कर आर्थिक रूप से सशक्त भी बन सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को उद्यमिता विकास, व्यवसाय प्रबंधन, सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश वन विभाग के उपनिदेशक जगदीश आर. ने डॉ. पूनम सिन्हा का स्वागत करते हुए कहा कि वन क्षेत्रों से सटे गांवों तक कौशल विकास एवं उद्यमिता योजनाओं की जानकारी पहुंचाना आवश्यक है, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर उपलब्ध हो सकें। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों द्वारा तैयार किए गए जूट के बैग, रोटी की टोकरी, पानी की बोतल कवर, टोपी और चप्पल सहित विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। डॉ. सिन्हा ने उत्पादों का अवलोकन कर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और उनके कार्य की सराहना की। 

इस अवसर पर निसबड के वरिष्ठ सलाहकार प्रदीप अरोड़ा, राज्य प्रमुख प्रभाकर बहुगुणा सहित वन विभाग एवं निसबड के अधिकारी और प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यशाला का उद्देश्य वन क्षेत्रों से जुड़े ग्रामीणों में उद्यमिता के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उन्हें कौशल विकास के माध्यम से स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना रहा।