मंगल पाण्डेय के बलिदान ने जगाई थी आजादी की पहली अलख: शैलेन्द्र दुबे
अखिल भारत नागरिक परिषद् ने जन्म जयंती पर आयोजित की श्रद्धांजलि सभा, युवाओं से राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान
लखनऊ। अखिल भारत नागरिक परिषद् के तत्वावधान में शनिवार को आशियाना स्थित कार्यक्रम स्थल पर प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत अमर शहीद मंगल पाण्डेय की जन्म जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित नागरिकों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर राष्ट्र के प्रति उनके अद्वितीय साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को नमन किया।
मुख्य वक्ता ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि मंगल पाण्डेय का बलिदान केवल एक सैनिक का विद्रोह नहीं, बल्कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम की प्रथम क्रांति का उद्घोष था। उन्होंने कहा कि 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध उनके साहसिक विद्रोह ने पूरे देश में स्वतंत्रता आंदोलन की चिंगारी प्रज्ज्वलित कर दी, जिसने आगे चलकर 1857 की महान क्रांति का रूप लिया। उन्होंने बताया कि चर्बी लगे कारतूसों के विरोध में मंगल पाण्डेय ने धर्म और देश की रक्षा के लिए अंग्रेज अधिकारियों के खिलाफ शस्त्र उठाए। अंग्रेज सरकार ने उन्हें कोर्ट मार्शल के बाद 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी, लेकिन उनका बलिदान देशवासियों के लिए आजादी की प्रेरणा बन गया। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में मंगल पाण्डेय का नाम सदैव प्रथम अमर क्रांतिकारी और स्वतंत्रता संग्राम के महानायक के रूप में याद किया जाएगा। शैलेन्द्र दुबे ने युवाओं से आह्वान किया कि वे मंगल पाण्डेय के राष्ट्रप्रेम, आत्मसम्मान, त्याग और साहस से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें तथा देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहें। कार्यक्रम में अखिल भारत नागरिक परिषद् की महामंत्री रीना त्रिपाठी, अरुण कुमार श्रीवास्तव, अनिल सिंह, रमेश शुक्ल, सरोजबाला सोनी, रेनू त्रिपाठी और अमरेन्द्र सिंह सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
