नारी-सम्मान पर कांग्रेस-सपा का दोहरा मापदंड क्यों? : डॉ. राजेश्वर सिंह
महिला आरक्षण, राजनीतिक भागीदारी और महिला अधिकारों पर विपक्ष को घेरा
सरोजनीनगर, संवाददाता। सरोजनीनगर के भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने महिला-सम्मान, महिला आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को घेरा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण की असली परीक्षा नारों और भाषणों से नहीं, बल्कि उन्हें अधिकार, सम्मान और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देने से होती है।
डॉ. सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों का हवाला देते हुए महिला-सम्मान के मुद्दे पर पार्टी के रुख को विरोधाभासी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला नेताओं के मामलों में कांग्रेस की प्रतिक्रिया एक समान नहीं रही है। उनके मुताबिक, महिला-सम्मान के मुद्दे पर राजनीतिक सुविधा के बजाय स्पष्ट और समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए। शाह बानो प्रकरण और तीन तलाक के मुद्दे का उल्लेख करते हुए विधायक ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों के मामले में राजनीतिक दलों को वोट-बैंक की राजनीति से ऊपर उठना चाहिए। उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी कांग्रेस, सपा समेत विपक्षी दलों से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को विधायिकाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की बात करने वाले दलों को इस दिशा में अपनी प्रतिबद्धता भी साबित करनी चाहिए। समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए डॉ. सिंह ने मुलायम सिंह यादव के पुराने बयान और आजम खां की ओर से महिला सांसद रमा देवी के प्रति की गई टिप्पणी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महिला-सम्मान और समान अधिकारों के मुद्दे पर सपा को भी अपनी राजनीतिक भूमिका का जवाब देना चाहिए। डॉ. सिंह ने कहा कि महिला हिंदू हो या मुस्लिम, सत्ता पक्ष की हो या विपक्ष की, उसकी गरिमा, सुरक्षा, शिक्षा और स्वतंत्रता के लिए समान मानदंड होने चाहिए। महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद और निर्णय लेने की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिला-सशक्तीकरण का अर्थ केवल भाषणों में नारी-शक्ति का उल्लेख करना नहीं, बल्कि महिलाओं को अधिकार, अवसर और राजनीतिक भागीदारी देना है। कांग्रेस और सपा को स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी राजनीति महिलाओं के वास्तविक अधिकारों के साथ खड़ी है या केवल वोट-बैंक तक सीमित है।
